उत्तर प्रदेश

क्या बीएचयू बनारस और उत्तर प्रदेश के बाहर है प्रशासन मौन क्यों?

।। मंगलवार देर रात में बीएचयू के छात्रों के हंगामे की वजह से बीएचयू की जबरदस्त किरकिरी हुई।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी-तमिल संगमम के लिए दक्षिण भारत से सैकड़ों गेस्ट बनारस आए हुए हैं। इन्हीं गेस्ट में से बड़ी संख्या में गेस्ट बीएचयू परिसर में भी रुके हैं। मंगलवार देर रात में बीएचयू के छात्रों के हंगामे की वजह से बीएचयू की जबरदस्त किरकिरी हुई। अब इस मामले में चीफ प्रॉक्टर की तहरीर पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में कुल दो नामजद और अज्ञात के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस बवाल में करीब 2 दर्जन से ज्यादा छात्रों और प्रॉक्टोरियल गार्ड को चोटें भी आई हैं।

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💫 बीएचयू में मंगलवार देर रात बवाल हो गया, क्या था पूरा मामला—

मंगलवार की देर रात बिहार का एक युवक अंकित सिंह अपने दोस्त श्रेयस के साथ बाइक से बीएचयू परिसर में जा रहा था। इसी बीच उसकी बाइक बीएचयू से निष्काषित छात्र गाजीपुर के अंकित पाल से टच हो गई। बिरला हॉस्टल के सामने हुई इस घटना के बाद अंकित पाल और उसके दोस्तों ने अंकित सिंह और श्रेयस को मारना शुरू कर दिया। चौराहे के पास मारपीट देख मौजूद प्रॉक्टोरियल गार्ड ने अंकित सिंह को अपने सुरक्षा में लेकर प्रॉक्टोरियल ऑफिस पहुंचाया।

इसी बीच श्रेयस बाइक लेकर भाग गया। मारपीट की खबर जैसे ही बिरला छात्रावास के छात्रों को हुई, तो दर्ज़नों की संख्या में छात्र प्रॉक्टोरियल ऑफिस पहुंचे और भाग निकले श्रेयस को वापस बुलवाने की जिद करने लगे। इस बात पर छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के मेंबर्स के बीच कहासुनी होने लगी। धीरे-धीरे बात बिगड़ गई। छात्रों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव के बाद प्रॉक्टोरियल गार्ड ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू की और छात्रों को वहां से खदेड़ा। इसी बीच छात्रों के कई गुट धीरे-धीरे लामबंद होकर पथराव करने लगे और एलडीए गेस्ट हाउस के बाहर काशी-तमिल संगमम में आए गेस्ट के स्वागत के लिए बैनर पोस्टर गमले तोड़ने लगे। मामला बिगड़ता देख कई थानों की फोर्स को परिसर में चीफ प्रॉक्टर ने बुलवा लिया। देर रात एसीपी समेत कई आला अधिकारी भी परिसर में पहुंच गए। करीब 3 घंटे की गोरिल्ला युद्ध के बाद परिसर में शांति बहाल हो सकी।

💫 दो नामजद, दोनों बाहरी, अब अज्ञात की तलाश में पुलिस—

देर रात हुए इस हंगामे के बाद बुधवार की सुबह चीफ प्रॉक्टर ने लंका थाने में लिखित शिकायत की। एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि मंगलवार देर रात हुए हंगामे में चीफ प्रॉक्टर बीएचयू की लिखित शिकायत में बिहार के रहने वाले अंकित सिंह और गाजीपुर के रहने वाले अंकित पाल को नामजद करते हुए करीब 5 दर्जन अज्ञात के खिलाफ बीएनएस की अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अंकित पाल बीएचयू से निष्काषित है और अंकित सिंह बाहरी है। पुलिस रात में हंगामा करने वाले छात्रों की सीसीटीवी वीडियो फुटेज के आधार पर चिह्नित कर कार्रवाई कर रही है।

अब तक बीएचयू का सबसे लापरवाह चीफ प्रॉक्टर शिव प्रकाश सिंह है | सिर्फ सरकारी लग्जरी गाड़ी से घूमना,अपनी सुरक्षा के लिए महमूरगंज स्थित निजी आवास पर चार सुरक्षाकर्मी 24 घंटे सरकारी वेतन पर लगा रखा है| और सरकारी लग्जरी गाड़ी में घूमने के लिए सरकारी वेतन से कुछ दलाल कुत्ते पाल रखे हैं |जो सुरक्षा नही दलाली करते हैं| चीफ प्रॉक्टर को चंदन के पेड़ को चोरी करके बेचने और पैसा और इज्जत लेकर महिला सुरक्षा कर्मी की भर्ती करने के अलावा कैंपस के किसी भी गतिविधि से कोई मतलब नहीं है| आप गौर करें तो इसके कार्यकाल के शुरुआत में ही
1- चंदन के कई करोड़ के पेड़ो की चोरी हो गई|

आईआईटी छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार|

2- एवं तमिल प्रोफेसर पर कैंपस के अंदर जानलेवा हमला किया गया|

3- बीएचयू कैंपस के बस के अंदर सुरक्षाकर्मी ने छात्रा के साथ जबरदस्ती और छेड़खानी की |

4- मेडिकल छात्र पर हमला किया गया|

5 – कुछ दिनों पूर्व एक सुरक्षाकर्मी नाम बिन्द यादव को ड्यूटी के दौरान हमला करके आंख फोड़ दिया गया जिससे उसकी आंख की रोशनी चली गई| चीफ प्राक्टर आरोपियों को सजा दिलाने के वजाय बीएचयू के सुरक्षा अधिकारी पर मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बनाने लगा और जब सुरक्षा अधिकारी ने इस अन्याय का विरोध किया उसे गाली गलौज करते हुए नियम विरुद्ध बरकच्छा साउथ केंपस ट्रांसफर कर दिया|

6- कुछ दिनों पूर्व एक सुरक्षाकर्मी पर बीएचयू हॉस्पिटल इमरजेंसी के बाहर सफाई कर्मचारी के पुत्र और और उसके दो साथियों द्वारा सुरक्षा कर्मी पर जानलेवा हमला करके कान काट के बाहर अलग कर दिया गया| उनके सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने रहे उन्होंने पीड़ित सुरक्षा कर्मी को बचाने की कोशिश तक नहीं की|

7- सिर्फ भर्ती के नाम पर पैसा कमाने के लिए चीफ प्राक्टर ने बाउंसरो की नियुक्ति की जिससे दलाली और पैसा कमाया जा सके| बाउंसरों द्वारा छात्रों और मरीज के तीमारदारों के साथ मारपीट की घटना तो आम हो गई जिस पर कोई कार्रवाई नहीं होती|

कल जब बनारस में शहर के अंदर मुख्यमंत्री योगी जी खुद मौजूद थे| और बीएचयू कैंपस के अंदर छात्रों और सुरक्षा कर्मियों के बीच पत्थरबाजी हो रही थी और कई दर्जनों की संख्या में लोग घायल हुए और खून बहा|
माननीय मोदी जी और योगी जी तस्वीर लगी पोस्टर फाड़ दी गई| विवाद की मुख्य वजह चीफ प्रॉक्टर शिव प्रकाश सिंह की अवयस्था थी|

आंतरिक विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार कुछ बाहरी अराजक तत्वों द्वारा बिना साइलेंसर भट्ट भट्ट आवाज वाली मोटरसाइकिल से एलडी चौराहा से लेकर बिरला एवं राजाराम छात्रावास तक ट्रैफिक नियम के विपरीत दौड़ाया जा रहा था| छात्रों ने इसका विरोध किया तो एक छात्र को टक्कर मार घायल कर दिया गया |जिसकी शिकायत लेकर वो चीफ प्रॉक्टर ऑफिस पहुंचा था| उसकी शिकायत सुनने के बजाय छात्र को घेर कर सुरक्षा कर्मियों द्वारा लाठी डंडों से पीटा गया जिसके बाद छात्र उग्र होते और कैंपस देखते ही देखते रणभूमि में तब्दील हो गया परिणाम स्वरुप दोनों तरफ से कई दर्जनों की संख्या में लोग घायल हुए|
चीफ प्रॉक्टर शिव प्रकाश सिंह की तानाशाही और सुरक्षा के प्रति उदासीनता ने इस विवाद को जन्म दिया क्योंकि चीफ प्रॉक्टर ने कभी भी अपनी लग्जरी गाड़ी से उतरकर अपने कार्यकाल के दौरान कैंपस की सड़कों पर घूम कर देखा ही नहीं लूटने खाने और लग्जरी गाड़ी से घूमने से फुर्सत नहीं है रात भर गेट अराजक तत्वों के लिए खुली रहती है|
पूरी रात बाहरी अपराधी तत्व कैंपस में शराब के नशे में घूमते रहते हैं| कोई भी अपराध अगर हो जाए तो पीड़ित को प्रॉक्टर ऑफिस डरा धमका के भगा देता है| एवं लंका थाना कैंपस का आंतरिक विषय का हवाला देते हुए जांच करने से इनकार कर देता है| जिसका प्रमाण मेरे पास मौजूद है| जिससे अपराध का ग्राफ दिखाई ना दे|
करोड़ों के सुरक्षा बजट के बाद मुख्यमंत्री जी के शहर में रहने के दौरान इस तरह की पत्थरबाजी होना कई सवाल खड़े करता है| कुलपति जिम्मेदार से कोई जवाब दे ही क्यों नहीं तय की कोई कार्रवाई क्यों नहीं की??
क्या बीएचयू बनारस और उत्तर प्रदेश के बाहर है प्रशासन मौन क्यों?

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